करवा चौथ आने वाली हैं !!आजकल.. एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में..,

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वह यह कि.. जैसे ही कोई हिन्दू त्यौहार आने वाला होता है, हम हिन्दू खुद ही.. उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो.. उनके ऊपर बोझ है उनका भद्दा मजाक.. फेसबुक और व्हाट्सएप पर बनाते हैं , और अपने ही त्यौहारों की.. पवित्रता गम्भीरता.. खत्म कर देते हैं !! देखिए क्या लिखा है,, ~ आदरणीय पति देव ! आपको सूचित किया जाता है कि आपके लम्बी आयु की वैलिडिटी खत्म होने वाली है और रिचार्ज की तिथि आ गयी है..! 4 November 2020 को.. स्पेशल करवाचौथ रिचार्ज करवाकर.. लंबी उम्र पाएं।  पत्नी के त्याग का मजाक बनाकर.. पत्नी को लालची और.. रिशवतखोर बताने लगते हैं !  हिन्दू धर्म की विडंबना देखिए :- जन्माष्टमी आयी तो श्री कृष्ण को टपोरी तडीपार और ना जाने क्या-क्या कहा! गणेश जी आये तो उनका भी मज़ाक़ बनाया! नवरात्रि आयी तो ये चुटकुला आया "नौ दिन दुर्गा-दुर्गा फिर मुर्गा-मुर्गा..." विजयादशमी पर श्री राम-माता सीता और रावण पर चुटकुले चले! अब दिवाली पर भी कुछ ना कुछ.. आ जायेगा! कभी सोचा है कि वास्तव में कौन है जो.. ये सब पोस्ट कर रहा है???  ये कभी किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की..! बस अपने मोबाइल प...

प्रेरक प्रसंग : माँ दुर्गा नें किया प्रचंड पराक्रमी असुर महिषासुर का संहार ( Mahishasura Story in Hindi)


अत्याचारी असुरों का नाश करने हेतु माँ भगवती नें कई अवतार लिए हैं। असुर महिषासुर का वध करने के लिए शक्ति माँ नें दुर्गा का अवतार लिया था। एक धार्मिक कथा अनुसार महिषासुर नें अपने बल और पराक्रम से स्वर्ग लोक देवताओं से छीन लिया था। तब सारे देवता मिल कर विष्णु भगवान एवं शंकर भगवान से सहाय मांगने उनके समक्ष गए। पूरी बात जान कर भगवान विष्णु एवं शंकर भगवान क्रोधित हो उठे।

और तब उन सभी के मुख से दिव्य तेज प्रकट हुआ जिस तेज से एक नारी का सर्जन हुआ। जिन्हें “दुर्गा” कहा गया।

  • भगवान शिव के तेज से मुख बना।
  • यमराज के तेज से केश बने।
  • भगवान विष्णु के तेज से भुजाएँ बनी।
  • चंद्रमाँ के तेज से वक्ष स्थल की रचना हुई।
  • सूर्यदेव के तेज से पैरों की उँगलियों की रचना हुई।
  • कुबेरदेव के तेज से नाक की रचना हुई।
  • प्रजापतिदेव के तेज से दांत बने।
  • अग्निदेव के तेज से तीनों नेत्र की रचना हुई।
  • संध्या के तेज से भृकुटी बनी।
  • वायुदेव तेज से कानों की उत्पति हुई।

दुर्गा माँ के दिव्य रूप के सर्जन करने के बाद देव गण नें उन्हे इन शस्त्रों से शुशोभित किया।

  • भगवान विष्णु नें सुदर्शन चक्र दिया
  • भगवान शंकर नें त्रिशूल दिया।
  • अग्निदेव नें अपनी प्रचंड श्कती प्रदान की।
  • वरुणदेव नें शंख भेट किया।
  • इन्द्रदेव नें वज्र और घंटा अर्पण किया।
  • पवनदेव नें धनुषबाण दिये।
  • यमराज नें काल दंड अर्पण किया।
  • प्रजापति दक्ष नें स्फटिक माला अर्पण की।
  • भगवान ब्रह्मा नें कमंडल दिया।
  • सूर्यदेव नें असीम तेज प्रदान किया।
  • सरोवर नें कभी ना मुरझानें वाली कमल की माला प्रदान की।
  • पर्वतराज हिमालय नें सवारी करने के लिए शक्तिशाली सिंह भेट किया।
  • कुबेरदेव नें मधु से भरा एक दिव्य पात्र दिया।
  • समुद्रदेव नें माँ दुर्गा को एक उज्ज्वल हार, दो दिव्य वस्त्र, एक दिव्य चूड़ामणि, दो कुंडल, दो कड़े, अर्ध चंद्र, एक सुंदर हँसली एवं उँगलियों में पहन नें के लिए रत्न जड़ित अंगूठियां दी।

श्स्त्रो से सुसज्जित माँ दुर्गा नें असुर महिषासुर से भीषण युद्ध किया और उसे परास्त कर के उसका वध कर दिया। उसके पश्चात दुर्गा माँ नें स्वर्गलोक पुनः देवताओं को सौप दिया। बलशाली असुर महिषासुर का हनन करने के बाद दुर्गा माँ महिषासुरमर्दिनी नाम से प्रसिद्धि हुईं।

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