करवा चौथ आने वाली हैं !!आजकल.. एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में..,
पड़ोसी देश पाकिस्तान में इन दिनों सब ठीक नहीं चल रहा है. भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश में लगे रहने वाला पाकिस्तान इन दिनों खुद सिविल वॉर जैसे हालातों का सामना कर रहा है. जिस पुलिस और सेना पर देश को संभालने की जिम्मेदारी होती है, वहां वही आमने-सामने (Police vs Army in Pakistan) आ गए हैं. अबतक 10 से ज्यादा पुलिसवालों के मारे जाने की खबर है.
एक्सपर्ट्स की मानें तो सिंध पुलिस का विद्रोह पाकिस्तान में एक और विभाजन की नींव बन सकता है. जानकारी मिली है कि इस सब के बीच जनता पुलिस के साथ है, जिसकी वजह से बांग्लादेश के बाद अब सिंधु देश बनने की प्रबल संभावनाएं हैं.
सबसे पहले जानिए कि आखिर पाकिस्तान में ऐसे हालात बने क्यों. दरअसल, यह सब शुरू हुआ था पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद मोहम्मद सफदर की गिरफ्तारी के बाद. सफदर अपनी पत्नी मरियम नवाज के साथ कराची के होटल में रुके हुए थे. उन्हें कायदे आजम मुहम्मद अली जिन्ना के मकबरे की पवित्रता भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. वह मकबरे तक भीड़ के साथ ऐसी नारेबाजी करते हुए गए थे, जिसे पाकिस्तानी सेना के खिलाफ माना जाता है.
खबरें हैं कि जब पुलिस को मोहम्मद सफदर की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. आदेश का पालन करवाने के लिए आर्मी ने दखल दिया और सिंध पुलिस के चीफ को ही पकड़ लिया. इस बात की पुष्टि वैसे किसी पाकिस्तानी मीडिया हाउस ने नहीं की लेकिन लेकिन सिंध प्रांत की पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस तरह की घटनाओं को दुखद बताया. मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब सिंध पुलिस के बड़े अधिकारियों ने घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए छुट्टी पर जाने की बात कह दी.
एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत को किसी भी सूरत में मूकदर्शक नहीं रहना चाहिए. बल्कि भारत को इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाना चाहिए कि सिंध प्रांत के लोगों को किस तरह से सेना का इस्तेमाल करके दबाया जा रहा है. सिंध के लोगों को हमेशा से लगता है कि पाकिस्तान में उनका शोषण हो रहा है. वे लोग कहते हैं कि उनकी नदियों पर बांध बनाकर बाकियों को फायदा पहुंचाया जाता है.
बता दें कि सिंध प्रांत की मांग लंबे अरसे से सेना के लिए गले की हड्डी बनी हुई है. वहां की सड़कों पर रह-रहकर यह नारा जोर मारता है ‘कल बना था बांग्लादेश, अब बनेगा सिंधुदेश’. सिंध प्रांत के लोग सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक रुप से भी पाकिस्तान से ना सिर्फ अलग पहचान रखते हैं, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी उनकी राष्ट्रीयता अलग तौर पर रही है. 1972 से अब तक अलग सिंधुदेश की मांग को लेकर कई आंदोलन हुए हैं, जिनमें हिंसा भी हुई.
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