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!! रावण की बुरी आदतें: अप्सरा रंभा के कारण रावण को मिला था ये शाप !!
रावण वैसे तो बहुत गुणी था, लेकिन उसमें कुछ बुराइयां भी थीं। रावण की बुराइयां ही उसकी अच्छाइयों पर भारी पड़ गई और उसके जीवन का अंत बहुत ही बुरी तरह से हुआ। रावण की बुराइयों के कारण ही उसके सभी पुत्र, भाई और कुल का नाश हो गया। रावण की एक बुराई यह थी कि वह सुंदर स्त्रियों को देखते ही मोहित हो जाता था।
शास्त्रों के अनुसार कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जहां रावण की इस बुराई का उल्लेख किया गया है। यहां पढ़िए रावण की इस बुराई को प्रकट करने वाला एक प्रसंग। यह प्रसंग देवराज इंद्र के स्वर्ग की अप्सरा रंभा जुड़ा हुआ है।
यह है प्रसंग...
रावण महिलाओं को सिर्फ उपभोग की वस्तु समझता था। एक बार रावण ने अप्सरा रंभा को देखा तो वह रंभा की सुंदरता पर मोहित हो गया। रावण अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए रंभा के शील का हरण कर लिया। जब रंभा ने नलकुबेर को यह बात बताई तो नलकुबेर ने रावण को शाप दिया था कि यदि रावण किसी भी स्त्री की इच्छा के बिना उसके शील का हरण करेगा या स्पर्श करेगा या अपने में महल में रखेगा तो वह भस्म हो जाएगा। इस कारण रावण ने सीता को अपने महल में नहीं, बल्कि अशोक वाटिका में रखा था।
पुत्र वधु समान थी रंभा
रावण के लिए रंभा पुत्र वधु समान थी, क्योंकि उस समय वह नलकुबेर के लिए आरक्षित थी। नलकुबेर रावण के भाई कुबेर देव का पुत्र था।
घमंड: अपनी शक्ति पर अति विश्वास
रावण को अपनी शक्तियों पर इतना भरोसा था कि वो बिना सोचे-समझे किसी को भी युद्ध के लिए ललकार देता था। इस आदत के कारण उसे कई बार युद्ध में हार का मुंह भी देखना पड़ा। शास्त्रों के अनुसार रावण को भगवान शिव, सहस्त्रबाहु अर्जुन, बालि और राजा बलि ने युद्ध में बुरी तरह हराया था। शक्तियों के घमंड के कारण ही रावण ने सीता का भी हरण किया और श्रीराम से युद्ध करने के लिए तैयार गया। अंत में श्रीराम द्वारा उसका वध कर दिया गया।
सिर्फ स्वयं की प्रशंसा सुनना
रावण की यह भी एक बुरी आदत थी कि वह सिर्फ खुद की प्रशंसा ही सुनता था। शत्रु का गुणगान करने वाले को वह दंड देता था। रावण के सामने उसकी प्रशंसा न करते हुए गलतियां बताने वालों को भी वह पसंद नहीं करता था। इसी वजह से रावण ने भाई विभीषण, नाना माल्यवंत, मंत्री शुक को अपने से दूर कर दिया था। रावण हमेशा ही चापलूसों से घिरा रहता था।
बालि से रावण की हार
बालि ने रावण को अपनी बाजू में दबा कर चार समुद्रों की परिक्रमा की थी। बालि इतना शक्तिशाली और तेजस्वी था कि वो रोज सुबह-सुबह ही चारों समुद्रों की परिक्रमा कर लेता था और कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता था।
सहस्त्रबाहु अर्जुन से रावण की हार
सहस्त्रबाहु अर्जुन के हजार हाथ थें और इसी वजह से उसका नाम सहस्त्रबाहु अर्जुन पड़ा था। जब रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंचा तो सहस्त्रबाहु ने अपने हजार हाथों से नर्मदा नदी के बहाव को दिया था। नर्मदा का पानी इकट्ठा किया और उस पानी में रावण को पूरी सेना के साथ बहा दिया था। इसके बाद एक बार फिर जब रावण युद्ध करने पहुंचा तो सहस्त्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था।
राजा बलि से रावण की हार
पाताल के राजा थे बलि। रावण युद्ध के लिए राजा बलि के महल तक पहुंच गया था। वहां पहुंचकर रावण ने बलि को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन महल में खेल रहे बच्चों ने ही रावण को पकड़कर अस्तबल में घोड़ों के साथ बांध दिया था।
शिवजी से रावण की हार
रावण अपनी शक्ति के मद में शिवजी को हराने के लिए कैलाश पर्वत पर पहुंच गया था। शिवजी उस समय ध्यान में लीन थे और रावण कैलाश पर्वत को उठाने लगा। तब शिवजी ने पैर के अंगूठे से कैलाश का भार बढ़ा दिया, इस भार को रावण वहन नहीं कर सका और उसका हाथ पर्वत के नीचे दब गया। इस हार के बाद रावण ने शिवजी को अपना गुरु बनाया था।
रावण था संगीत का जानकार
रावण संगीत का बहुत बड़ा जानकार था। शास्त्रों के अनुसार सरस्वती के हाथ में जो वीणा है, वह रावण का ही अविष्कार था। रावण ज्योतिषी भी था। रावण ने रावण संहिता नामक ग्रंथ की रचना भी की थी। साथ ही, वह तंत्र-मंत्र और आयुर्वेद का भी विशेषज्ञ था।
ऐसा था रावण का वैभव
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार रावण के दरबार में सारे देवता और दिग्पाल हाथ जोड़कर खड़े रहते थे। रावण के महल में जो अशोक वाटिका थी, उसमें अशोक के एक लाख से ज्यादा वृक्ष थे। इस वाटिका में सिर्फ रावण ही जा सकता था, किसी अन्य पुरुष को इस वाटिका में जाने की अनुमति नहीं थी।
वीर योद्धा भी था रावण
रावण जब भी युद्ध करने निकलता तो वह खुद बहुत आगे चलता था और बाकी सेना पीछे होती थी। शास्त्रों के अनुसार उसने कई युद्ध तो अकेले ही जीते थे। रावण ने यमपुरी जाकर यमराज को भी युद्ध में हरा दिया था और नर्क की सजा भुगत रही जीवात्माओं को मुक्त कराकर अपनी सेना में शामिल किया था।
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